महाराष्ट्र की नगर राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (KDMC) में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) द्वारा एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना को समर्थन देने के फैसले ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। इस घटनाक्रम को उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच हाल ही में बनी राजनीतिक नजदीकी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में यह समर्थन ऐसे समय पर सामने आया है, जब शिवसेना (शिंदे) और बीजेपी के बीच मेयर पद को लेकर खींचतान जारी है। हालांकि दोनों दलों ने चुनाव साथ लड़ा था और उनके पास मिलकर बहुमत से ज्यादा सीटें हैं, लेकिन सत्ता के बंटवारे को लेकर अंदरूनी मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं।
KDMC में सीटों का गणित
107 वार्ड वाली कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका में बहुमत का आंकड़ा 62 है। चुनावी नतीजों के अनुसार, शिंदे गुट की शिवसेना को 53 सीटें, बीजेपी को 50 सीटें, MNS को 5 सीटें, शिवसेना (UBT) को 11 सीटें, कांग्रेस को 2 और एनसीपी (SP) को 1 सीट मिली है।
संख्याबल के बावजूद, शिवसेना और बीजेपी के बीच मेयर पद को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। इसी बीच MNS के पांच पार्षदों का शिंदे गुट को समर्थन देने की खबर ने राजनीतिक समीकरणों को और जटिल बना दिया है।
ठाकरे खेमे की बढ़ी चिंता
इस घटनाक्रम से उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (UBT) की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पार्टी के चार पार्षदों के संपर्क से बाहर होने की खबरों ने पहले ही असहज स्थिति पैदा कर दी थी। हालांकि बाद में मुंबई की नवनिर्वाचित पार्षद सरिता म्हस्के की वापसी की घोषणा कर पार्टी ने स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन असंतोष की चर्चाएं अभी भी थमी नहीं हैं।
शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर राज ठाकरे से बात की है। राउत के मुताबिक, राज ठाकरे ने स्पष्ट किया कि MNS का यह कदम पार्टी का आधिकारिक फैसला नहीं है, बल्कि स्थानीय नेतृत्व द्वारा लिया गया निर्णय है।
MNS का तर्क: स्थिरता जरूरी
MNS नेता राजू पाटील ने कहा कि उनकी पार्टी का उद्देश्य सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि महानगरपालिका में स्थिरता लाना है। उन्होंने कहा कि बीजेपी और शिवसेना पहले से ही साथ हैं, इसलिए उनका समर्थन उसी गठबंधन को दिया गया है।
राजू पाटील के अनुसार, MNS प्रमुख राज ठाकरे ने स्थानीय नेताओं को क्षेत्रीय परिस्थितियों के अनुसार फैसले लेने की छूट दी है। यदि यह व्यवस्था आगे बढ़ती है तो एक न्यूनतम साझा कार्यक्रम तैयार किया जाएगा, ताकि विकास कार्य बिना रुकावट के पूरे हो सकें।
शिंदे गुट का दावा: महायुति में कोई दरार नहीं
शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने MNS के समर्थन को “विकास और स्थिरता के लिए सकारात्मक कदम” बताया। उन्होंने कहा कि मेयर और डिप्टी मेयर पद को लेकर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और बीजेपी नेतृत्व मिलकर लेंगे।
वहीं शिवसेना नेता नरेश म्हस्के ने इन अटकलों को खारिज किया कि इससे महायुति में कोई दरार पड़ेगी। उनका कहना है कि विकास के लिए अगर कोई दल साथ आता है, तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए।
उल्हासनगर और चंद्रपुर में भी सियासी खींचतान
कल्याण-डोंबिवली के अलावा उल्हासनगर और चंद्रपुर में भी राजनीतिक समीकरण अस्थिर बने हुए हैं। उल्हासनगर के 78 सदस्यीय सदन में बीजेपी के 37 और शिवसेना के 36 पार्षद हैं, जबकि बहुमत का आंकड़ा 40 है। यहां शिंदे गुट ने VBA और एक निर्दलीय पार्षद का समर्थन हासिल किया है।
चंद्रपुर में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि बीजेपी दूसरे स्थान पर है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बीजेपी सत्ता बनाए रखने के लिए निर्दलीय पार्षदों और अन्य दलों से संपर्क कर रही है। दोनों ही दल अंदरूनी गुटबाजी से जूझ रहे हैं, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।
क्या ठाकरे गठबंधन को लगेगा बड़ा झटका?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि MNS का यह कदम स्थानीय राजनीति तक सीमित हो सकता है, लेकिन इसके संकेत राज्य की राजनीति पर भी असर डाल सकते हैं। राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के बीच हालिया मेल-मिलाप को मराठी राजनीति के लिए अहम माना जा रहा था, ऐसे में यह घटनाक्रम उस गठबंधन की मजबूती पर सवाल खड़े करता है।
आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह समर्थन केवल नगर निगम तक सीमित रणनीति है या महाराष्ट्र की राजनीति में किसी बड़े बदलाव की शुरुआत।

