बिहार में कांग्रेस को RJD से अलग होना होगा, राहुल गांधी के सामने पप्पू यादव की दो टूक, दिल्ली बैठक में उठा संगठन का मुद्दा

manish kumar
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बिहार में कांग्रेस को RJD से अलग होना होगा? पप्पू यादव ने राहुल गांधी के सामने रखी खरी-खरी

बिहार की राजनीति में कांग्रेस की भूमिका और भविष्य को लेकर एक बार फिर गंभीर मंथन शुरू हो गया है। राजधानी दिल्ली में शुक्रवार को कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें सांसद पप्पू यादव ने खुलकर यह राय रखी कि अगर कांग्रेस को बिहार में खुद को मजबूत करना है, तो उसे राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सहारे राजनीति करने से बाहर आना होगा।

यह बैठक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के दिल्ली स्थित आवास पर बुलाई गई थी। बैठक में राहुल गांधी, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, और बिहार से जुड़े कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता मौजूद थे। चर्चा का मुख्य विषय बिहार में कांग्रेस की कमजोर संगठनात्मक स्थिति और आने वाले चुनावों की रणनीति रही।

पप्पू यादव की स्पष्ट बात

सूत्रों के अनुसार, पप्पू यादव ने बैठक में साफ शब्दों में कहा कि कांग्रेस लंबे समय से बिहार में RJD की सहयोगी पार्टी बनकर रह गई है, जिससे पार्टी की अपनी राजनीतिक पहचान कमजोर हुई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का बिहार में एक मजबूत इतिहास रहा है, लेकिन गठबंधन की राजनीति में पार्टी धीरे-धीरे हाशिए पर चली गई।

पप्पू यादव ने यह भी कहा कि अगर कांग्रेस को जमीनी स्तर पर दोबारा खड़ा होना है, तो उसे स्वतंत्र सोच, खुद का नेतृत्व और अपना संगठन तैयार करना होगा। केवल गठबंधन के भरोसे चुनाव लड़ने से पार्टी को कोई दीर्घकालिक फायदा नहीं मिलेगा।

संगठन की कमजोरी पर चिंता

बैठक में शामिल कई नेताओं ने माना कि बिहार में कांग्रेस संगठन लंबे समय से कमजोर स्थिति में है। नेताओं का कहना था कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी का सही ढंग से गठन नहीं हो पाया है, जिसकी वजह से कार्यकर्ताओं में निराशा है और चुनावी तैयारियां प्रभावित हुई हैं।

यह सुझाव भी सामने आया कि पार्टी को तुरंत बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी का पुनर्गठन करना चाहिए और जिला व ब्लॉक स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देनी चाहिए।

राहुल गांधी ने ध्यान से सुनी बात

बैठक के दौरान राहुल गांधी ने सभी नेताओं की राय को गंभीरता से सुना। हालांकि उन्होंने कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया, लेकिन सूत्रों के मुताबिक उन्होंने कहा कि कांग्रेस को राज्यों में स्थानीय राजनीतिक हालात के अनुसार फैसले लेने होंगे और संगठन को मजबूत करना पार्टी की प्राथमिकता है।

केसी वेणुगोपाल का बयान

बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि बिहार में कांग्रेस लंबे समय से अपने पैरों पर खड़े होने की कोशिश कर रही है। उन्होंने माना कि संगठनात्मक कमजोरियों के कारण पार्टी को नुकसान हुआ है और इन्हें दूर करने के लिए नेतृत्व स्तर पर चर्चा जारी है।

बिहार की राजनीति में नए संकेत

दिल्ली बैठक और पप्पू यादव के बयान के बाद यह साफ हो गया है कि कांग्रेस बिहार में अपनी रणनीति को लेकर नए सिरे से सोच रही है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि कांग्रेस RJD से दूरी बनाकर अकेले चुनाव लड़ने का फैसला करती है या गठबंधन में रहते हुए अपनी शर्तों पर आगे बढ़ती है।

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