Jaunpur News | क्या है पूरा मामला?
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां नीट की तैयारी कर रहे एक युवक ने एमबीबीएस में दाखिला पाने के लिए इंसानियत की सारी हदें पार कर दीं। आरोप है कि युवक ने दिव्यांग कोटे का फायदा उठाने के उद्देश्य से खुद ही अपने पैर का पंजा काट लिया और फिर मारपीट की झूठी कहानी गढ़कर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की।
यह मामला जौनपुर के लाइन बाजार थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। युवक की पहचान सूरज भास्कर के रूप में हुई है, जो वर्ष 2026 में नीट परीक्षा के जरिए एमबीबीएस में दाखिला लेना चाहता था।
दिव्यांग सर्टिफिकेट पाने की कोशिश, लेकिन फेल
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि अक्टूबर महीने में सूरज भास्कर वाराणसी स्थित बीएचयू गया था, जहां उसने दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने की कोशिश की थी। हालांकि, चिकित्सकीय जांच में वह दिव्यांग नहीं पाया गया, जिसके बाद उसका सर्टिफिकेट जारी नहीं किया गया।
इसके बाद सूरज ने खुद को गंभीर रूप से घायल करने की योजना बनाई, ताकि दिव्यांग कोटे के तहत एमबीबीएस में प्रवेश पा सके।
मारपीट की झूठी कहानी और FIR
घटना के बाद सूरज ने पुलिस को बताया कि कुछ अज्ञात लोगों ने उसके साथ बेरहमी से मारपीट की, जिसमें उसका पैर बुरी तरह घायल हो गया। सूरज के बयान के आधार पर पुलिस ने दो अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की।
लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, सूरज की कहानी पर शक गहराता चला गया।
गर्लफ्रेंड के बयान से खुला राज
मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब पुलिस ने सूरज की गर्लफ्रेंड से पूछताछ की। उसने बताया कि सूरज लंबे समय से नीट को लेकर मानसिक दबाव में था और दिव्यांग कोटे से दाखिले को लेकर चर्चा करता रहता था। इसी बयान के बाद पुलिस को पूरी घटना के पूर्व नियोजित होने का संदेह हुआ।
पुलिस का आधिकारिक बयान
सीओ सिटी गोल्डी गुप्ता ने मामले पर जानकारी देते हुए बताया,
“जिस समय सूरज द्वारा मारपीट की बात कही जा रही थी, उस समय के साक्ष्य और परिस्थितियां उसके बयान से मेल नहीं खा रही थीं। प्रारंभिक जांच में स्पष्ट हुआ है कि चोट स्वयं द्वारा पहुंचाई गई प्रतीत होती है। मामले की गहन जांच जारी है।”
कानूनी कार्रवाई संभव
यदि जांच में यह साबित होता है कि सूरज ने जानबूझकर खुद को नुकसान पहुंचाया और पुलिस को झूठी सूचना दी, तो उसके खिलाफ गंभीर धाराओं में कार्रवाई हो सकती है। साथ ही झूठी एफआईआर दर्ज कराने का मामला भी बन सकता है।
समाज के लिए गंभीर संदेश
यह घटना न सिर्फ कानून के दुरुपयोग का मामला है, बल्कि उन वास्तविक दिव्यांगों के अधिकारों पर भी चोट है, जिनके लिए यह आरक्षण व्यवस्था बनाई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं का बढ़ता दबाव युवाओं को गलत और खतरनाक रास्तों पर ले जा रहा है।

